कोषागार

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मंडलीय अतरिक्त निदेशक कोषागार और पेंशन

मंडलीय स्तर पर अतरिक्त निदेशक कोषागार के कार्यालय स्थापित किये गए हैं, जिनके कार्य और जिम्मेदारिया निम्न प्रकार है:

  • अपने मंडल के कोषागारो का वर्ष में दो बार निरीक्षण करना और इसके दौरान पाई गई अनियमितताओं को दूर करना।
  • यह सुनिश्चित करना कि लेखा समय पर ए.जी. को प्राप्त हो जाए तथा कोषागार द्वारा वित्त सांख्यकीय निदेशालय को निविष्टियां भेज दी जाएँ।
  • उप कोषागार अधिकारी, सहायक लेखा अधिकारी तथा मुख्य रोकड़िया का मंडल के अंदर स्थान्तरण करना।
  • सहायक लेखा अधिकारी/ उप कोषागार अधिकारी जो मंडल के कोषागारो और उप कोषागारो में हो रहे कंप्यूटरीकरण की जांच और निरिक्षण करते हैं, उनका अर्जित अवकाश, अवकाश नगदीकरण, चिकित्सीय अवकाश तथा जी.पी.एफ. से अस्थाई पेशगी देना।
  • मंडल के सभी विभागों और कार्यालयों से सम्बंधित लंबित लेखा परीक्षण कार्यों का समय से निस्तारण।
  • मंडल के सभी शासकीय कार्यालयों में वेतन निर्धारण आतंरिक लेखा परीक्षण, वित्त और लेखा सम्बन्धी अन्य कार्यो का निरीक्षण।
  • भारत सरकार द्वारा भुगतान दावो के वाउचरों का अभिलेखन सुनिश्चित करना।
    सी.सी.एल. /डी.सी.एल. का कड़ाई से अनुपालन करना।
  • कोषागारों द्वारा यह सुनिश्चित करना कि स्टाम्प के लिए मांग समय से उचित अधिकारियों को दिया जाए।
  • शिकायतों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करना।
  • अप्रैल 1, 2000 से सभी वर्ग बी और सी कर्मचारियों को पेंशन, ग्रेच्युटी तथा पेंशन का नकदीकरण स्वीकृत करना।
  • कोषागार अधिकारियों की चरित्र पंजिका लिखने के लिए समीक्षा अधिकारी के रूप में काम करना।

मुख्य  कोषाधिकारी

मुख्य कोषागार अधिकारी अधिकतर मंडल मुख्यालय स्थित कोषागारो में नियुक्त हैं और अधिकांश जिला कोषागारों को वरिष्ठ कोषागार अधिकारी स्तर पर प्रोन्नत कर दिया गया है। कोषागार अधिकारी कार्यालय का प्रमुख है, तथा कोषागार के अंतर्गत कोषागार और उप कोषागार के लिए आहरण और संवितरण अधिकारी (ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर) है। कोषागार का अधिशाषी नियंत्रण कोषागार अधिकारी में निहित है। इनके कार्य मुख्यतः इस प्रकार हैं: उचित मंजूरी समस्त प्रकार के बीजको (बिल) को भुगतान के लिए अधिकृत करना; राज्य कर्मचारियों के पेंशन का भुगतान, भारत सरकार के नागरिक और सैन्य पेंशन; स्टाम्प, अफीम तथा अन्य कीमती वस्तुओं को कोषागार में उचित सुरक्षा में रखना; महालेखाकार के उपयोग में लाने के लिए कोषागार और उप कोषागार में प्राप्त हुई और भुगतान की गयी सभी शासकीय धनराशि का अनुरक्षण करना। दिनांक जून 6, 1994 के एक सरकारी आदेश के द्वारा कोषागार अधिकारी को बजट नियंत्रण की भी जिम्मेदारी दी गई है। सरकारी कर्मचारियों के समूह बीमा सम्बन्धी कार्य भी जिला कोषागार को स्थान्तरित कर दिया गया है। कोषागार अधिकारी से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वह जिले के उप कोषागारों का निरीक्षण करे। वह सरकार और महालेखाकार के प्रति हर उन दावों की वैधता के लिए उत्तरदायी है जो उसने भुगतान के लिए पारित किये हैं। प्रतिदिन के कार्यों के लिए वह जिलाधिकारी के आधीन कार्य करता है।

एक कोषागार को दो अनुभागो में बांटा गया है एक नगद भुगतान जो प्रमुख रोकड़िया के अंतर्गत आता है और दूसरा लेखा अनुभाग जो सहायक कोषागार अधिकारी के आधीन है। प्रमुख रोकड़िया नगद अनुभाग का प्रभारी होता है और वह नगद, स्टाम्प तथा अन्य कीमती वस्तुओं की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी है जो दोहरे चाभी वाले ताले में रखी जाती है। इन चाभियो का एक सेट प्रमुख रोकडिया के पास होता है और दूसरा सेट कोषागार अधिकारी/ वरिष्ठ कोषागार अधिकारी /प्रमुख कोषागार अधिकारी के पास रहता है। उप कोषागार में दोहरे चाभियो वाले ताले की चाभी का एक सेट सहायक रोकड़िया और दूसरा सहायक कोषागार अधिकारी के पास रहता है। प्रमुख रोकडिया एक चाभी वाले ताले का भी प्रभारी होता है। लेखा अनुभाग सभी सरकारी प्राप्तियों और भुगतान का हिसाब रखता है साथ ही पर्सनल लेजर अकाउंट (पी.एल.ए.) सरकारी जमा और नकद-व-उधार (कैश एंड क्रेडिट) का भी हिसाब रखता है।